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हीट सà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‹à¤• कà¥à¤¯à¤¾ है ?
हीट सà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‹à¤• अतà¥à¤¯à¤§à¤¿à¤• तापमान में लंबे समय तक रहने के कारण होता है और इसे ततà¥à¤•ाल इलाज की जरूरत होती है। आमतौर पर डिहाइडà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤¨ तथा शरीर के तापमान नियंतà¥à¤°à¤£ पà¥à¤°à¤£à¤¾à¤²à¥€ की विफलता के कारण होता है। शरीर का तापमान अगर 104 फारेनहाइट से अधिक होता है तो इसे हीट सà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‹à¤• का लकà¥à¤·à¤£ माना जाता है। हीट सà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‹à¤• के कारण सेनà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤² नरà¥à¤µ सिसà¥à¤Ÿà¤® में à¤à¥€ कामà¥à¤ªà¤²à¤¿à¤•ेशन देखने को मिलता है।
हीट सà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‹à¤• आमतौर पर तब होता है जब शरीर में पानी और नमक की मातà¥à¤°à¤¾ कम हो जाती है और पसीना आना à¤à¥€ बंद हो जाता है। सामानà¥à¤¯ लकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ में घबराहट, बेचैनी, मतली, दौरे, बेहोशी जैसे लकà¥à¤·à¤£ देखने को मिलते हैं कà¤à¥€-कà¤à¥€ इंसान कोमा में à¤à¥€ चला जाता है। बेहोशी को पहला लकà¥à¤·à¤£ माना जा सकता है।
ये तब होता है, जब आपका शरीर अपने तापमान को कंटà¥à¤°à¥‹à¤² नहीं कर पाता. हीट-सà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‹à¤• होने पर शरीर का तापमान तेजी से बढ़ता है और कम नहीं हो पाता. जब किसी को लू लगती है तो शरीर का सà¥à¤µà¥‡à¤Ÿà¤¿à¤‚ग मैकेनिजà¥à¤® यानी पसीना तंतà¥à¤° à¤à¥€ फेल हो जाता है और इंसान को बिलà¥à¤•à¥à¤² पसीना नहीं आता.
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